30 July 2020

Swar Vigyan Hindi7 - चिकित्सा में स्वरों की प्रयोग विधी , पंचमहाभूतों का स्वर पर प्रभाव

चिकित्सा में स्वरों की प्रयोग विधी

पंचमहाभूतों का स्वर पर प्रभाव




चिकित्सा में स्वरों की प्रयोग विधी :

  1.  गर्मी सम्बन्धी रोग :- गर्मी, प्यास, बुखार, पीत्त सम्बन्धी रोगों में चन्द्र स्वर चलाने से शरीर में शीतलता बढ़ती है, जिससे गर्मी से उत्पन्न असंतुलन दूर हो जाता है।

  2.  कफ सम्बन्धी रोग:- सर्दी, जुकाम, खांसी, दमा आदि कफ सम्बन्धी रोगों में सूर्य स्वर अधिकाधिक चलाने से शरीर में गर्मी बढ़ती है। सर्दी का प्रभाव दूर होता है।

  3. आकस्मिक रोग:-

प्रत्येक व्यक्ति को स्वर में होने वाले परिवर्तनों का नियमित आंकलन और समीक्षा करनी चाहिये। दिन-रात 12 घंटे चन्द्र और 12 घंटे सूर्य स्वर चलना संतुलित स्वास्थ्य का सूचक होता है।

यदि एक स्वर ज्यादा और दूसरा स्वर कम चले तो शरीर में असंतुलन की स्थिति बनने से रोग होने की संभावना रहती है। हम स्वर के अनुकूल जितनी ज्यादा प्रवृत्तियां करेंगे, उतनी अपनी क्षमताओं का अधिकाधिक लाभ अर्जित कर सकेंगे।

स्वरोदय विज्ञान के अनुसार व्यक्ति प्रातः निद्रा त्यागते समय अपना स्वर देखें। जो स्वर चल रहा है, धरती पर पहले वही पैर रखे। बाहर अथवा यात्रा में जाते समय पहले वह पैर आगे बढ़ावे, जिस तरफ का स्वर चल रहा है। साक्षात्कार के समय इस प्रकार बैठे की साक्षात्कार लेने वाला व्यक्ति बंद स्वर की तरफ हो, तो सभी कार्यों में इच्छित सफलता अवश्य मिलती है।


पंचमहाभूतों का स्वर पर प्रभाव :

पंच महाभूत तत्व (आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी) तथा ज्योतिष के नव ग्रह की स्थिति का भी हमारे स्वर से प्रत्यक्ष-परोक्ष सम्बन्ध होता है। शरीर में प्रत्येक समय अलग-अलग तत्वों की सक्रियता होती है। शरीर की रसायानिक संरचना में भी पृथ्वी और जल तत्व का अनुपात अन्य तत्वों से अधिक होता है। सारी दवाईयां प्रायः इन्हीं दो तत्वों का प्रतिनिधित्व करती है। इस लिए जब शरीर में पृथ्वी तत्त्व प्रभावी होता है, उस समय किया गया उपचार सर्वाधिक प्रभावशाली होता है। उससे कम जल तत्त्व की सक्रियता पर प्रभाव पड़ता है।


शरीर में किस समय कौनसा तत्त्व प्रभावी होता है, उनको निम्न प्रयोगों द्वारा मालूम किया जा सकता है।

विधि नं. 1

  1. यदि पीला रंग दिखाई दे तो उस समय शरीर में पृथ्वी तत्त्व प्रभावी होता है।
  2. यदि सफेद रंग दिखाई दे तो उस समय शरीर में जल तत्त्व प्रभावी होता है।
  3. यदि लाल रंग दिखाई दे तो उस समय शरीर में अग्नि तत्त्व प्रभावी होता है।
  4. यदि काला रंग दिखाई दे तो उस समय शरीर में वायु तत्त्व प्रभावी होता है।
  5. यदि मिश्रीत (अलग-अलग) रंग दिखाई दे तो उस समय शरीर में आकाश तत्त्व प्रभावी होता है।

विधी नं. 2

  1. जब मुख का स्वाद मधुर हो, उस समय पृथ्वी तत्त्व सक्रिय होता है।
  2. जब मुख का स्वाद कसैला हो, उस समय जल तत्त्व सक्रिय होता है।
  3. जब मुख का स्वाद तीखा हो, उस समय अग्नि तत्त्व सक्रिय होता है।
  4. जब मुख का स्वाद खट्टा हो, उस समय वायु तत्त्व सक्रिय होता है।
  5. जब मुख का स्वाद कड़वा हो, उस समय आकाश तत्त्व सक्रिय होता है।

विधि नं. 3

स्वच्छ दर्पण पर मुंह से श्वास छोड़ने पर (फूंक मारने पर) जो आकृति बनती है, वे उस समय शरीर में प्रभावी तत्व को इंगित करती है।

  1. यदि मुंह से निकलने वाली वाष्प से चौकोर आकार बनता हो तो-पृथ्वी तत्व की प्रधानता

  2. यदि मुंह से निकलने वाली वाष्प से त्रिकोण आकार बनता हो तो- अग्नि तत्व की प्रधानता

  3. यदि मुंह से निकलने वाली वाष्प से अर्द्ध चंद्राकार आकार बनता हो तो- जल तत्व की प्रधानता

  4. यदि मुंह से निकलने वाली वाष्प से वृताकार (गोल) आकार बनता हो तो-

  5. यदि मुंह से निकलने वाली वाष्प से मिश्रित आकार बनता हो तो- आकाश तत्व की प्रधानता

जिज्ञासु व्यक्ति अनुभवी स्वरशास्त्री से स्वरोदय विज्ञान का अवश्य गहन अध्ययन करें। क्योंकि स्वर विज्ञान से न केवल रोगों से बचा जा सकता है अपितु प्रकृति के अदृश्य रहस्यों का भी पता लगाया जा सकता है। मानव देह में स्वरोदय एक ऐसी आश्चर्यजनक, सरल, स्वावलम्बी, प्रभावशाली, बिना किसी खर्च वाली चमत्कारी प्रणाली होती है जिसका ज्ञान और सम्यक् पालना होने पर किसी भी सांसारिक कार्यों में असफलता की प्राय: संभावना नहीं रहती। स्वर विज्ञान के अनुसार प्रवृत्ति करने से साक्षात्कार में सफलता, भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास, सामने वाले व्यक्ति के अन्तरभावों को सहजता से समझा जा सकता है। जिससे प्रतिदिन उपस्थित होने वाली प्रतिकूल परिस्थितियों से सहज बचा जा सकता है। अज्ञानवश स्वरोदय की जानकारी के अभाव से ही हम हमारी क्षमताओं से अनभिज्ञ होते हैं। रोगी बनते हैं तथा अपने कार्यों में असफल होते हैं। स्वरोदय विज्ञान प्रत्यक्ष फलदायक है, जिसको ठीक-ठीक लिपीबद्ध करना संभव नहीं। केवल जनसाधारण के उपयोग की कुछ मुख्य सैद्धान्तिक बातों की आंशिक और संक्षिप्त जानकारी ही यहां दी गई हैं।


सबका मंगल हो, सबका कल्याण हो, सभी शांत, प्रसन्न, स्वस्थ एवं रोग मुक्त हों।



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