23 June 2020

Facts About Jagannath Temple In Puri - पुरी में जगन्नाथ मंदिर के बारे में तथ्य

Facts About Jagannath Temple In Puri - पुरी में जगन्नाथ मंदिर के बारे में तथ्य


Facts About Jagannath Temple In Puri




इस साल जगन्नाथ यात्रा नही हो पाएगी इस महामारी के कारण । इतिहास के जानकारों के अनुसार इस यात्रा को 284 साल के बाद स्थगित किया गया है आए जाने इस पोस्ट के द्वारा भगवान जगन्नाथ के बारे में और उन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य । महाप्रभ जगन्नाथाश्री कष्ण) को कलियुग का भगवान भी कहते है पुरी (उड़ीसा) में जग्गनाथ स्वामी अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ निवास करते है मगर रहस्य ऐसे है कि आजतक कोई न जान पाया।


हर 12 साल में महाप्रभु की मूर्ती को बदला जाता है,उस समय पूरे पुरी शहर में ब्लैक आउट किया जाता है यानी पूरे शहर की लाइट बंद की जाती है। लाइट बंद होने के बाद मंदिर परिसर को CRPF की सेना चारो तरफ से घेर लेती है उस समय कोई भी मंदिर में नही जा सकता.


मंदिर के अंदर घना अंधेरा रहता है पुजारी की आँखों मे पट्टी बंधी होती है पुजारी के हाथ में दस्ताने होते है वो पुरानी मूर्ती से "ब्रह्म पदार्थ" निकालता है और नई मूर्ती में डाल देता है ये ब्रह्म पदार्थ क्या है आजतक किसी को नही पता...इसे आजतक किसी ने नही देखा, हज़ारो सालो से ये एक मूर्ती से दूसरी मूर्ती में ट्रांसफर किया जा रहा है ये एक अलौकिक पदार्थ है जिसको छूने मात्र से किसी इंसान के जिस्म के चिथड़े उड़ जाए। इस ब्रह्म पदार्थ का संबंध भगवान श्री कृष्ण से है मगर ये क्या है,कोई नही जानता। ये पूरी प्रक्रिया हर 12 साल में एक बार होती है उस समय सुरक्षा बहुत ज्यादा होती है ।


झंडा हमेशा हवा की उल्टी दिशा मे लहराता है दिन में किसी भी समय भगवान जगन्नाथ मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई नहीं बनती। भगवान जगन्नाथ मंदिर के45 मंजिला शिखर पर स्थित झंडे को रोज बदला जाता है, ऐसी मान्यता है कि अगर एक दिन भी झंडा नहीं बदला गया तो मंदिर 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा। इसी तरह भगवान जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र भी है, जो हर दिशा से देखने पर आपके मुंह आपकी तरफ दीखता है। भगवान जगन्नाथ मंदिर की रसोई में प्रसाद पकाने के लिए मिट्टी के 7 बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं, जिसे लकड़ी की आग से ही पकाया जाता है, इस दौरान सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान पहले पकता है।


भगवान जगन्नाथ मंदिर में हर दिनबनने वाला प्रसाद भक्तों के लिए कभी कम नहीं पड़ता, लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि जैसे ही मंदिर के पट बंद होते हैं वैसे ही प्रसाद भी खत्म हो जाता है। ये सब बड़े आश्चर्य की बात हैं

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