17 June 2020

Coordination of body, mind and soul is necessary for health - स्वास्थ्य हेतु शरीर, मन और आत्मा का तालमेल जरूरी

Coordination of body, mind and soul is necessary for health - स्वास्थ्य हेतु शरीर, मन और आत्मा का तालमेल जरूरी

Coordination of body, mind and soul is necessary for health


आत्मा अथवा उस चैतन्य के प्रति सजगता यानी आरोग्य के प्रति सजगता और उसका विस्मरण अर्थात् रोगों को निमन्त्रण । चैतन्य का मतलब आन्तरिक सजगता। यह वह चिकित्सक है जो सभी में उपस्थित है। हमारीसारी शारीरिक, एवं मानसिक क्रियाओं का संचालन कर्ता यही तत्त्व है। हम जो आहार करते हैं उसका सप्त धातुओं में परिवर्तन इसी चैतन्य शक्ति द्वारा संपादित होता है। सच्चा चिकित्सक तो चैतन्य ही है। अत: अन्त: प्रेरणा की उपेक्षा न करें। चैतन्य को विकारों से मुक्त करें।

शारीरिक ऊर्जा मिलती है भोजन, पानी, हवा, सूर्य का प्रकाश, व्यायाम, आराम तथा इनसे सम्बन्धित अन्य स्वास्थ्य वर्धक साधनों से । मानसिक ऊर्जा का संग्रह होता है मन कि स्थिरता से, अर्थात् मौन, एकाग्रता एवं ध्यान से। आत्मिक ऊर्जा मिलती है अशुभ कर्मों की निर्जरा से। इन सभी के लिए आवश्यक होता है सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन, सम्यक् आचरण और सम्यक् तप । आज बुद्धि, तर्क एवं ज्ञान के क्षेत्र में काफी विकास हुआ है, परन्तु उसका प्रयोग अधिकांश तया भौतिक अथवा जो नाशवान है उसी के लिए हो रहा है। उसमें स्वयं की आत्मा के विकास की शक्ति नहीं। आत्मा की उपेक्षा करने वाला ज्ञान, बुद्धि विवेक सम्यक् नहीं कहा जा सकता। ठीक उसी प्रकार हमारी सोच और दृष्टिकोण काफी व्यापक हुई है, परन्तु उसमें आत्म दृष्टि न होने से उस दर्शन को सम्यक् दर्शन नहीं कहा जा सकता। प्रत्येक व्यक्ति आचरण और पुरुषार्थ तो करता ही है परन्तु उसका पुरुषार्थ उसकी क्षमता एवं प्राथमिकतानुसार न होने से सम्यक् पुरुषार्थ नहीं कहा जा सकता। जब तक ज्ञान, दर्शन और चारित्र अथवा आचरण सम्यक् और मानव जीवन के सही लक्ष्य के अनुरूप नहीं होगा, हमारा जीवन स्थायी रूप से स्वस्थ, सुखी और सफल नहीं हो सकता।

स्वस्थ जीवन जीने के लिए शरीर, मन और आत्मा, तीनों की स्वस्थता आवश्यक होती है। तीनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। तीनों के विकारों को दूर कर तथा संतुलित रख आपसी तालमेल द्वारा ही स्थायी स्वास्थ्य को जीया जा सकता है। अत: स्वास्थ्य की चर्चा करते समय जहाँ एक तरफ हमें यह समझना आवश्यक है कि शरीर, मन और आत्मा का सम्बन्ध क्या है ? किसका कितना महत्त्व है? दूसरी तरफ जीवन की मूलभूत आवश्यक ऊर्जा स्रोतों का सम्यक् उपयोग करना होता है तथा दुरुपयोग अथवा अपव्यय रोकना पड़ता है।


सबका मंगल हो, सबका कल्याण हो, सभी शांत, प्रसन्न, स्वस्थ एवं रोग मुक्त हों।


Relationship of soul and body - आत्मा और शरीर का सम्बन्ध

Essential holistic approach to health - स्वास्थ्य हेतु समग्र दृष्टिकोण आवश्यक

No comments: